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Aarti

Jagannath Ji Ki Aarti

जगन्नाथ जी की आरती

Shri Jagannath

Jagannath Ji Ki Aarti

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हिन्दी

|| जय जय श्री जगन्नाथ || चतुर्भुज जगन्नाथ, कंठ शोभित कौस्तुभः। पद्मनाभ, बेडगरवहस्य, चन्द्र सूरज्या बिलोचनः॥ जगन्नाथ, लोकानाथ, निलाद्रिह सो पारो हरि। दीनबंधु, दयासिंधु, कृपालुं च रक्षकः॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ कम्बु पानि, चक्र पानि, पद्मनाभो, नरोत्तमः। जग्दम्पा रथो व्यापी, सर्वव्यापी सुरेश्वराहा॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ लोका राजो, देव राजः, चक्र भूपह स्कभूपतिहि। निलाद्रिह बद्रीनाथशः, अनन्ता पुरुषोत्तमः॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ ताकारसोधायोह, कल्पतरु, बिमला प्रीति बरदन्हा। बलभद्रोह, बासुदेव, माधवो, मधुसुदना॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ दैत्यारिः, कुंडरी काक्षोह, बनमाली, बडा प्रियाह। ब्रम्हा बिष्णु, तुषमी, बंगश्यो, मुरारिह कृष्ण केशवः। श्री राम, सच्चिदानंदोह॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ गोबिन्द परमेश्वरः, बिष्णुुर बिष्णुुर, महा बिष्णुपुर। प्रवर बिशणु महेसरवाहा, लोका कर्ता, जगन्नाथो॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ महीह करतह महजतहह। महर्षि कपिलाचार व्योह। लोका चारिह सुरो हरिह, वातमा चा जीबा पालसाचा॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ सूरह संगसारह पालकह, एको मीको मम प्रियो। ब्रम्ह बादि महेश्वरवरहा, दुइ भुजस्च चतुर बाहू॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ सत बाहु सहस्त्रक, पद्म पितर बिशालक्षय। पद्म गरवा परो हरि, पद्म हस्तेहु, देव पालो॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ दैत्यारी दैत्यनाशनः, चतुर मुरति, चतुर बाहु। शहतुर न न सेवितोह, पद्म हस्तो, चक्र पाणि॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥ संख हसतोह, गदाधरह, महा बैकुंठबासी चो। लक्ष्मी प्रीति करहु सदा॥ ॥ जय जय श्री जगन्नाथ ॥